Holi Festival Information


दोस्तों होली फागुन महीने में पूर्णिमा के दिन प्रत्येक वर्ष पूरे भारत में बहुत ही उत्साह पूर्वक के साथ मनाई जाती है | आज के इस आर्टिकल पोस्ट में मैं आप लोगों को होली के संदर्भ में महत्वपूर्ण बातें बताने वाला हूं | बच्चे बूढ़े और जवान सभी को होली का बेसब्री से इंतजार रहता है| सभी बहुत ही बेसब्री से इस दिन का इंतजार करते हैं| होली रंगों का त्योहार होता है एक दूसरे को रंग लगाने की चाहत में लोगों का दिल बेकरार रहता है|दोस्तों संग हंसी मजाक का माहौल जमता है| जिस तरह पूरे भारत में जितनी भी पर्व मनाए जाते हैं | उन सभी पर्व के पीछे कोई ना कोई ऐतिहासिक घटना होती है|उसी तरह Holi festival मनाने के पीछे भी एक इतिहासिक तथ्य है|वैसे तो आप सभी जानते हैं की होली बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में मनाई जाती है | लेकिन आज के इस आर्टिकल में मैं आपको विस्तृत रूप से यह जानकारी दूंगा...



Holi Festival Information

हिरण्यकश्यप जो कि एक राक्षस प्रवृत्ति का राजा था वह खुद को बहुत ही शक्तिशाली समझता था उसे अपनी शक्ति पर बहुत ही ज्यादा घमंड था और वह खुद को भगवान समझता था|लोगों को वह कहता था मेरे राज्य में कोई भी किसी भी भगवान का पूजा नहीं करेगा अगर कोई पूजा करेगा तो वह मेरा पूजा करेगा क्योंकि मैं भगवान हूं|इस तरह की धारणा वह अपने मन में पाल चुका था और भगवान होने का दावा करता था|हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष दोनों कश्यप ऋषि के पुत्र थे|दोनों भाइयों में सबसे ज्यादा शक्तिशाली हिरण्यकश्यप था|भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष को मारने के लिए वाराह अवतार लिया और फिर हिरण्याक्ष का वध किया|हिरण्यकश्यप कठोर तप कर भगवान ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर यह वरदान पा लिया की आपके द्वारा बनाया गया कोई भी पशु, पंछी, प्राणी, मनुष्य, दैत्य, देवता कोई भी हो मेरा वध ना कर पाए| ना दिन, ना रात, ना घर के बाहर, ना घर के अंदर कोई भी मुझे ना मार सके| इतना ही नहीं हिरण्यकश्यप ने यह भी वरदान मांगा कि कोई ना उसे अस्त्र के प्रहार से ना शास्त्र के प्रहार से मार सके| ना कोई मुझे मार सके आकाश में, ना पाताल में, ना स्वर्ग में, ना पृथ्वी पर|ब्रह्मा जी से यह वरदान पाकर खुद को भगवान समझने लगा और अब हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु से हिरण्याक्ष के वध का बदला लेना चाहता था| वो धीरे धीरे अपनी शक्ति के घमंड में अहंकारी बन गया और लोगों पर अत्याचार करने लगा| लोगों से अपनी पूजा करवाने लगा| इस दुष्ट राक्षस प्रवृत्ति वाले राजा का एक पुत्र था जिसका नाम प्रहलाद था| जो भगवान विष्णु का प्रिय भक्त था| प्रह्लाद ने कभी भी अपने पिता हिरण्यकश्यप का कहना नहीं माना और वह भगवान विष्णु की पूजा करता था|वह अपने पिता को भगवान नहीं मानता था इससे क्रोधित होकर प्रह्लाद के पिता ने होलीका को बुलाकर कहा कि तुम प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाओ इस तरह वे प्रह्लाद को आग में जलाकर मार देना चाहता था| दरअसल होलीका को यह वरदान प्राप्त था कि आग उसको जला नहीं सकती है|आग से उसको कोई भी नुकसान नहीं होगा| परंतु भगवान का चमत्कार देखिए भक्त प्रह्लाद को तो कुछ भी नहीं हुआ परंतु होलीका उस आग में जलकर भस्म हो गई| इसके बाद भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण कर हिरण्यकश्यप को अपनी जांघ पर रखकर उसका सीना फाड़ दिया| इस तरह बुराई पर अच्छाई की जीत हुई तभी से होली का त्योहार मनाया जाता है और होलीका आग में जली थी | इसलिए होली से एक दिन पहले होली जलाई जाती है | दोस्तों इस पोस्ट में आपने पढ़ा Holi Festival Information होली का त्योहार क्यों मनाया जाता है अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आए तो इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि लोगों को पता चल सके होली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है सभी लोग होली के त्यौहार मनाने के पीछे की वजह को और इस पर्व के महत्व को जान सकें...

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