motivational story in hindi for students

motivational story in hindi  hindi story  moral stories in hindi  inspirational stories in hindi  short stories in hindi  hindi stories  motivational story in hindi for students  hindi kahani  hindi story book  short moral stories in hindi  inspirational stories in marathi  inspirational stories in hindi for students  short motivational stories with moral
motivational story in hindi for students

गंगा नदी के तट पर बसा एक छोट सा गांव सबलपुर में चार मित्र रहते थे । चारों मित्रों में गहरी मित्रता थी, पहले मित्र का नाम अब्दुल दूसरे मित्र का नाम हामिद तीसरे मित्र का नाम हैदर और चौथे मित्र का नाम राजू था । सभी मित्र एक साथ पढ़ाई किया करते थे । चारों मित्र प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटे थे । सभी मित्र खूब मन लगाकर पढ़ाई करते थे । चारों मित्र गरीब किसान के बेटे थे । वे पढ़ाई के साथ साथ अपने पिता की खेत में मदद भी किया करते थे । परंतु राजू ना तो मन लगाकर पढ़ाई किया करता था । और ना ही खेत में अपने पिता की सहायता करता था वह हमेशा पढ़ाई लिखाई और कामकाज ना करने के बहाने ढूंढता रहता था । समय बीतता गया एक दिन रेलवे मैं रिक्त पदों के लिए बहाली निकलती है । सभी मित्रों ने रेलवे में आवेदन किया । अब वे सभी अपनी अपनी पढ़ाई में जुट गए । सभी खूब मन लगाकर पढ़ रहे थे उन सभी में सबसे तेज पढ़ाई में अब्दुल था । सभी मित्रों ने रेलवे परीक्षा सीबीटी वन दिया परंतु किसी भी मित्र का सीबीटी वन क्लियर नहीं हो पाया । सभी मित्रों में निराशा थी तभी अब्दुल ने कहा मित्रों हमने पहली बार प्रतियोगी परीक्षा दी है । अगर इस परीक्षा में हम सफल ना हो पाए तो हमें अपनी असफलता को स्वीकार कर हममे क्या कमी रह गई है, उस कमी को सुधारना चाहिए, और आगे की चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए । सभी मित्र अब्दुल की बातों से सहमत होते हैं । और एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने में जुट जाते हैं, परंतु राजू कहता है अभी परीक्षा होने में चार से पांच महीने का समय है ।

अभी बहुत टाइम है इस तरह वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान कम देता, और ऑनलाइन फेसबुक व्हाट्सएप ग्रुप चैट और इधर घूमता फिरता रहता था । अब्दुल ने एक दिन राजू से कहा राजू अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो अगर तुम इसी तरह पढ़ाई करोगे तो तुम कभी भी अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाओगे । दुश्मन को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए और इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है उसका आलस तुम पढ़ाई से बहुत भागते हो परंतु अब्दुल की बातों का राजू पर कोई असर नहीं हुआ । उसके मन में तो बस एक ही बात बैठी थी मैंने एक साल तक लगातार जम कर पढ़ाई की है । अब आगे की परीक्षाओं के लिए मैं तैयार हूं बस परीक्षा से पहले रिवीजन करके जाऊंगा एक बार फिर से सरकारी नौकरी की बहाली निकलती है । सभी दोस्त उस नौकरी के लिए अप्लाई करते हैं । इस बार अब्दुल सरकारी नौकरी को लेने में कामयाब हो जाता है, परंतु बाकी के मित्र असफल हो जाते हैं ।

हमिद और हैदर ने अपनी कमजोरियों को पहचाना वे किस विषय में कमजोर थे । अपनी उस कमजोरी को दूर करने में लग गए वे दोनों काफी मेहनत करते दोनों ने खूब मन लगाकर पढ़ाई की । परंतु राजू अपने अंदर की कमजोरियों को पहचानने में असफल रहा । वह अपने अंदर की कमजोरियों को दूर करने के बजाय अपनी किस्मत को दोष देता रहा । और वो यह सोच रहा था शायद उसके जीवन में सरकारी नौकरी नहीं है । गांव के सभी लोग अब्दुल की प्रशंसा किया करते हैं । एक बार फिर से हम हामिद हैदर और राजू सरकारी नौकरी की परीक्षा देते हैं । इस परीक्षा में हामिद और हैदर पास हो जाते हैं, गांव के सभी लोग अब्दुल हमीद और हैदर की प्रशंसा करते नहीं थकते हैं । आज हामिद और हैदर की खुशी का ठिकाना नहीं था । वे दोनों बहुत ही खुश थे परंतु दूसरी तरफ अपने परम मित्र राजू की असफलता को देख कर दुखी भी थे । राजू के माता पिता राजू पर बहुत ही क्रोधित हो रहे थे ।राजू के पिता राजू से कह रहे थे । तुम्हारे सभी मित्रो को सरकारी नौकरी लग चुकी है । वे सभी अपनी पढ़ाई मन लगाकर किया करते थे परंतु तुम सारा दिन मोबाइल पर चिपके रहते थे । तुम्हारा ध्यान पढ़ाई पर तो था ही नहीं, तुम्हारे सारे दोस्तों की एक-एक करके नौकरी लग चुकी है । दिन रात खेत में काम करके कड़ी धूप में अपना पसीना बहा बहा कर तुम्हारे जरूरतों की चीजें कोचिंग की फीस मैं किस तरह जमा करता हूं क्या तुमने कभी सोचा है । अपने पिता की डांट सुनकर राजू की आंखें खुल जाती है । वह अपने पिता से वादा करता है । मैं इस बार जरूर अपने मकसद में कामयाब हो जाऊंगा । मैं इस बार जरूर पास हो जाऊंगा ।

बस मुझे एक और मौका दीजिए बाबूजी मुझ पर विश्वास कीजिए । अब मेरी आंखें खुल चुकी है । मैं गलत था अब मैं दिन रात मेहनत करके इस बार परीक्षा में जरूर पास हो जाऊंगा । राजू के पिता राजू को समझाते हुए कहते हैं । जीवन में अगर सफल होना है तो अपने लक्ष्य की ओर ध्यान दो अपने लक्ष्य से ना भटको । पिता की डांट और गांव के लोगों की कड़वी बोली सुन कर राजू बहुत उदास हो जाता है । तभी उसे अपने तीन मित्र मिलते हैं अब्दुल हमीद और हैदर तीनों मित्र राजू को समझाते हैं । दोस्त अगर जीवन में सफल होना है तो तुम्हें अपने अंदर की कमजोरियों को दूर करना पड़ेगा । तुम्हें अपनी कमजोरियों को पहचानना होगा । तुम मे क्या कमी रह गई है उसे जानो और उसे सुधारो अगर तुम अपनी कमजोरियों को पहचान कर सुधार लेते हो तो तुम भी अपने मकसद में जरूर कामयाब हो जाओगे । और हां मेरी एक बात हमेशा याद रखना समय कभी लौटकर वापस नहीं आता । हम सभी के अंदर कमजोरियां थीं परंतु हम मे और तुम मे बस फर्क इतना है हम सभी ने अपनी अपनी कमजोरियों को पहचान कर सुधार लिया परंतु तुम अपनी कमजोरियों को अनदेखा करते रहे और किस्मत को दोष देते रहे । राजू ने अपने तीनों मित्रों से कहा तुम सब सही कह रहे हो । मैं कुछ ज्यादा ही ओवर कॉन्फिडेंस हो गया था । अपनी कमजोरियों को दूर करने के बजाय अपनी कमजोरियों से दूर भागता था और मैं हमेशा यह सोचा करता था कि अभी परीक्षा को काफी समय है और समय देखते देखते कब बीत जाता है । पता ही नहीं चलता, इसलिए मैं अब यह जान चुका हूं कि हमें अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए । असफलता से घबराकर सफलता पाने की चाहत को दिल से निकाल देना नहीं चाहिए । बल्कि हमें यह मालूम करना चाहिए कि हमारे अंदर क्या कमी रह गई है । आखिर मैं अगर असफल हुआ हूं तू किस कारण मुझ में क्या कमी रह गई है । अपनी कमियों को सुधारना चाहिए । असफलता सफलता की सीढ़ी होती है । असफलता हमें यह बताती है कि हमारे अंदर क्या कमी रह गई है । अगर सफल होना है अपनी जिंदगी में तो अपनी कमियों को सुधारना पड़ेगा । मैं अब यह जान चुका हूं और मुझे मालूम है मेरे अंदर क्या कमी है । अब मैं अपने अंदर की कमियों को सुधारूंगा और देखना मेरे दोस्त मैं भी तुम लोगों की तरह एक दिन जरूर अपने मकसद में कामयाब होकर दिखाऊंगा । मुझे अपनी गलती का एहसास उस समय हुआ जब मेरे पिताजी ने मुझे पहली बार डाटा । हमारे माता पिता हमारी उज्जवल भविष्य के लिए ना जाने कितनी कुर्बानियां देते हैं । और हमें पता तक नहीं चलता है । कड़ी धूप में अपना पसीना बहाकर अपना पेट काटकर अपनी चाहतों का गला दबाकर हमारे माता पिता हमें पढ़ाते लिखातें हैं ताकी एक दिन उनका बेटा पढ़ लिखकर कामयाब हो जाए ताकि वे उनकी बुढ़ापे का सहारा बन सके । तीनों मित्र राजू की बात सुनकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं और कहते हैं वह दोस्त तेरे अंदर जो बदलाव आया है उसे देख कर मुझे लगता है अब तु जरूर अपनी मंजिल को पाने में कामयाब हो जाएगा । समय करवट बदलती है और एक बार फिर से रेलवे में सरकारी नौकरी की बहाली निकलती है । इस बार राजू जमकर रेलवे परीक्षा की तैयारी करता है । आज राजू बहुत ज्यादा उत्साहित था क्योंकि रेलवे परीक्षा एडमिट कार्ड निकल चुका था । कुछ दिनों के बाद राजू रेलवे की परीक्षा देता है । इस बार राजू रेलवे की परीक्षा में पास हो जाता है । राजू और उसके माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहता है । आखिरकार राजू अपने मकसद में कामयाब हो जाता है । 

Comments